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क्या है कारण?
2025 में वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में उछाल कई प्रमुख कारकों से प्रेरित है, जिसमें साल की शुरुआत से कीमतें 40% से अधिक बढ़ी हैं और अब 1 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं।
निम्नलिखित इसके मुख्य कारण हैं:
भू-राजनीतिक अनिश्चितता: अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध, रूस-यूक्रेन संघर्ष और मध्य पूर्व में अशांति के कारण निवेशक सोने को सुरक्षित आश्रय मान रहे हैं।
व्यापार शुल्क और नीतिगत अनिश्चितता: राष्ट्रपति ट्रम्प के आक्रामक शुल्क, जैसे चीनी आयात पर 125% शुल्क, आर्थिक अस्थिरता की आशंका बढ़ाते हैं, जिससे सोने की मांग बढ़ रही है।
केंद्रीय बैंक खरीदारी: चीन, भारत और पोलैंड जैसे देशों के केंद्रीय बैंक अमेरिकी डॉलर की विश्वसनीयता और वित्तीय प्रतिबंधों की चिंताओं के बीच भंडार विविधीकरण के लिए सोना खरीद रहे हैं।
अमेरिकी डॉलर का कमजोर होना: तीन साल के निचले स्तर पर पहुंचा डॉलर गैर-अमेरिकी मुद्रा धारकों के लिए सोना सस्ता करता है, जिससे वैश्विक मांग बढ़ रही है।
मुद्रास्फीति और स्टैगफ्लेशन का डर: अमेरिका में लगातार मुद्रास्फीति और स्टैगफ्लेशन की चिंताएं, जहां उपभोक्ता मुद्रास्फीति की उम्मीदें 33 साल के उच्चतम स्तर पर हैं, सोने को मुद्रास्फीति से बचाव का साधन बनाती हैं।
कम ब्याज दरें: 2025 में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें सोने को बांड जैसे आय-जननकारी परिसंपत्तियों की तुलना में अधिक आकर्षक बनाती हैं।
ईटीएफ और निवेशक मांग में उछाल: यूरोप और चीन में वैश्विक सोने के ईटीएफ में निवेश बढ़ा है, जो 2024 के बहिर्वाह को उलट रहा है और तेजी के रुख को दर्शाता है।
बाजार की अस्थिरता: इक्विटी बाजार में गिरावट और बढ़ती अस्थिरता, जिसमें एसएंडपी 500 में 15% से अधिक की कमी आई है, निवेशकों को मूल्य के स्थिर भंडार के रूप में सोने की ओर ले जा रही है।
ये कारक मिलकर सोने की तेजी को बढ़ावा दे रहे हैं, हालांकि कुछ विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि आर्थिक स्थिरता या केंद्रीय बैंक नीतियों में बदलाव होने पर कीमतों में सुधार हो सकता है।








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