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मुंबई :
‘सर्टिफिकेट कोर्स इन मॉडर्न फार्माकॉलॉजी’ (CCMP) पूरा करने वाले होम्योपैथी डॉक्टरों को अब महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) में पंजीकरण की अनुमति मिल गई है। इससे उन्हें एलोपैथी दवाइयाँ लिखने का अधिकार मिलने की संभावना है। होम्योपैथी डॉक्टरों का कहना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएँ मजबूत होंगी। वहीं, अन्य संगठनों का कहना है कि केवल एक साल की फार्माकॉलॉजी पढ़कर एलोपैथी डॉक्टरों के बराबर अधिकार देना खतरनाक है।
अलग रजिस्टर में होगा नामांकन-
CCMP कोर्स करने वाले डॉक्टरों के लिए ‘MMC’ में एक अलग रजिस्टर तैयार किया जाएगा। केवल इसी रजिस्टर में दर्ज डॉक्टरों को एलोपैथी दवाइयाँ लिखने की अनुमति होगी।
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी मजबूती-
ग्रामीण इलाकों में एलोपैथी डॉक्टरों की कमी है। ऐसे में होम्योपैथी डॉक्टर पहले से ही बड़ी संख्या में सेवा देते हैं। अब उन्हें एलोपैथी दवाइयाँ देने की अनुमति मिल सकती है, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है।
IMA का विरोध और सेवाबंदी आंदोलन-
5 सितंबर 2025 को राज्य सरकार और MMC ने BHMS-CCMP डॉक्टरों के पंजीकरण का आदेश जारी किया। इसके विरोध में इंडियन मेडिकल असोसिएशन (IMA) महाराष्ट्र ने 18 सितंबर सुबह 8 बजे से 19 सितंबर सुबह 8 बजे तक सेवाबंदी आंदोलन का आह्वान किया।
प्रैक्टिस के लिए नियम और शर्ते –
नए नियमों के अनुसार, होम्योपैथी डॉक्टर केवल वही एलोपैथी दवाइयाँ लिख पाएँगे, जो उन्हें CCMP कोर्स में सिखाई गई हैं। उन्हें सभी तरह की एलोपैथी दवाइयाँ लिखने का अधिकार नहीं होगा।
- गंभीर बीमारियों की दवाइयाँ
- शल्यक्रिया (सर्जरी)
- विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा दी जाने वाली औषधियाँ
इन पर उनका कोई अधिकार नहीं होगा। इनकी प्रैक्टिस पर MMC और स्वास्थ्य विभाग की कड़ी निगरानी रहेगी।









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