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मुंबई : बच्चों के स्वास्थ्य को खतरा पैदा करने वाली दवाओं के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार ने सख्त कदम उठाया है। मध्य प्रदेश और राजस्थान में बच्चों की मौत के बाद अब महाराष्ट्र सरकार ने ‘कोल्ड्रिफ’ कफ सिरप की बिक्री, उत्पादन और वितरण पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
राज्य के अन्न एवं औषधि प्रशासन विभाग (FDA) ने इस आदेश को तात्कालिक प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, यदि यह सिरप किसी भी मेडिकल स्टोर पर बिकता हुआ पाया गया, तो नागरिक एफडीए के टोल-फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा ज़िले में कुछ बच्चों की संदिग्ध मौत के बाद जांच में सामने आया कि इन मौतों का संबंध ‘कोल्ड्रिफ’ सिरप से है। इस सिरप में ‘डायथिलीन ग्लायकॉल’ (DEG) नामक जहरीला तत्व पाया गया, जिससे बच्चों की किडनी फेल हो गई। अब तक 18 बच्चों की मौत की पुष्टि अधिकारियों ने की है।
घटना के बाद महाराष्ट्र में औषधि प्रशासन विभाग ने राज्यभर में मेडिकल स्टोर्स और थोक विक्रेताओं की जांच मुहिम शुरू की है। संदिग्ध दवाओं के नमूने एकत्र कर प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। एफडीए के सहआयुक्त मनीष चौधरी ने बताया कि नागपुर और आसपास के क्षेत्रों में अब तक ‘कोल्ड्रिफ’ सिरप का कोई स्टॉक नहीं मिला है, लेकिन सभी थोक विक्रेताओं पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
नागपुर के शासकीय मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर मनीष तिवारी ने कहा कि इस सिरप में मौजूद रासायनिक तत्व किडनी पर गंभीर असर डाल सकते हैं। इसलिए पांच साल से कम उम्र के बच्चों को कोई भी कफ सिरप देने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए। स्वास्थ्य सेवा उपसंचालक डॉ. शशिकांत शंभरकर ने बताया कि विदर्भ में अब तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन सभी जिलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
राज्य सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी ‘कोल्ड्रिफ’ सिरप का स्टॉक, बिक्री या वितरण दिखाई दे, तो तुरंत एफडीए के टोल-फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज कराएं। औषधि प्रशासन विभाग ने राज्यभर में जांच अभियान शुरू कर दिया है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।









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