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मुंबई: मराठा समाज को ओबीसी आरक्षण दिलाने के लिए राज्य सरकार द्वारा 2 सितंबर को जारी कुणबी प्रमाणपत्र जीआर को लेकर मुंबई हाईकोर्ट ने तुरंत स्थगित करने से इनकार कर दिया है।
इस जीआर के खिलाफ कई याचिकाएँ दायर की गई थीं, जिन पर आज मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड़ की खंडपीठ ने सुनवाई की। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार और संबंधित विभाग से प्रतिज्ञापत्र प्राप्त किए बिना कोई अस्थायी रोक नहीं लगाई जा सकती।
कोर्ट ने सरकार और प्रतिवादियों को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई दिवाली के बाद होगी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि जीआर लागू रहने से असमानता और जटिलता बढ़ेगी, लेकिन अदालत ने कहा कि सरकार को जवाब देने के लिए पर्याप्त समय देना आवश्यक है।
इस फैसले से फिलहाल मराठा समाज को आंशिक राहत मिली है क्योंकि कुणबी प्रमाणपत्र जीआर पर तुरंत रोक नहीं लगी है।









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