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मुंबई: शिवसेना शिंदे गुट के दसरा मेले में पूर्व मंत्री रामदास कदम ने एक बड़ा बयान देते हुए सवाल उठाया कि “हिंदुहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे का शव मातोश्री पर दो दिन तक क्यों रखा गया?” कदम ने इस मामले की स्वतंत्र जांच की भी मांग की।
इस बयान ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी और बालासाहेब ठाकरे के निधन से जुड़ी घटनाएं फिर से चर्चा का विषय बन गईं।
कदम के आरोपों पर शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के सांसद संजय राउत ने कड़ा रुख अपनाते हुए पलटवार किया। राउत ने कहा, “बालासाहेब के बारे में इस तरह बोलना उनके प्रति बेईमानी है। मातोश्री में उनके शव के दौरान हमने और शिवसैनिकों ने अंतिम समय तक पूरा ध्यान रखा। रामदास कदम उस समय वहां मौजूद भी नहीं थे, इसलिए उनके आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं।”
रामदास कदम ने एक और सवाल उठाते हुए कहा कि “बालासाहेब के हाथों के निशान क्यों लिए गए? जैसे माँसाहेब के अंगुलियों के निशान लिए जाते थे, क्या मातोश्री में भी ऐसे विचार थे?” इस टिप्पणी ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी।
संजय राउत ने आगे कहा, “जिस पार्टी ने हमें और आपको नेता बनाया, उसके प्रमुखों के खिलाफ ऐसा बोलना अनुचित और झूठा है।”
दसरा मेला अब इस विवाद के चलते चर्चा का केंद्र बन गया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह विवाद आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति का तापमान और बढ़ा सकता है।









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