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मुंबई : महाराष्ट्र का राजस्व विभाग अब पूरी तरह से जनाभिमुख बनाने की तैयारी में है। जटिल कानूनों को सरल बनाना, जमीन के मालिकाना हक (टाइटल क्लियर) पर स्पष्टता देना, विभाग की सभी सेवाओं को पारदर्शी और तेज़ करना तथा नागरिकों को घर बैठे सेवा उपलब्ध कराना – इन मुद्दों पर विभाग बड़े बदलाव कर रहा है।
राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि “आरक्षण विवाद क्षणिक है, जनता विकास के साथ आगे बढ़ना चाहती है।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिवस के अवसर पर राजस्व विभाग द्वारा “सेवा पखवाड़ा” मनाया जा रहा है। इसी सिलसिले में बावनकुले ने विभाग की योजनाओं और भविष्य की दिशा पर विस्तार से चर्चा की।
सेवा पखवाड़े के फायदे-
17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक “छत्रपति शिवाजी महाराज महाराजस्व अभियान” चलाया जा रहा है। इसके तहत:
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने के लिए पनंद रास्तों से अतिक्रमण हटाने, माप-जोख व जियो-रेफरेंसिंग की जाएगी।
- हर सड़क को सांकेतिक क्रमांक दिया जाएगा। महाराष्ट्र ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बनेगा।
- 25 लाख परिवारों को प्रॉपर्टी कार्ड और लगभग 50 लाख परिवारों को सरकारी सेवाओं का प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
पुराने कानूनों का अंत-
- कई पुराने कानूनों को रद्द किया जा रहा है।
- तुकड़ाबंदी कानून खत्म होने से 45-50 लाख परिवारों को मालिकाना हक मिलेगा।
- विभाग का 90% काम तकनीक आधारित और ऑनलाइन होगा, जिससे नागरिकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
- प्रशासनिक नियंत्रण-
आने वाले महीनों में “राजस्व वार रूम” के डैशबोर्ड से तलाठी से लेकर सचिव तक हर अधिकारी के कामकाज पर नज़र रखी जाएगी। इससे विभागीय कामकाज में पारदर्शिता और गति आएगी।
ओबीसी आरक्षण पर स्पष्टता-
ओबीसी समाज की 353 जातियों के हक़ का आरक्षण किसी और को नहीं दिया जाएगा। बावनकुले ने कहा कि, “मराठा समाज को आरक्षण देने में ओबीसी का नुकसान नहीं होने देंगे। उपसमिति इसके लिए मज़बूत पक्ष रख रही है।”
राजनीतिक मुद्दों पर जवाब-
- शरद पवार पर: जनता उन्हें भली-भांति जानती है, वे जो कहते हैं स्थिति उसके उलट होती है।
- ठाकरे बंधु: राज और उद्धव ठाकरे राजनीति के कारण अलग हुए और राजनीति ही उन्हें जोड़ रही है। लेकिन भाजपा की संगठनात्मक मज़बूती के सामने उनका मिलन असरदार नहीं होगा।
- राहुल गांधी: मत चोरी का आरोप निराधार है। यह कांग्रेस की गुटबाज़ी और नेतृत्व संकट को छुपाने की कोशिश है।
‘लाडकी बहन’ योजना पर-
इस योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत आधार मिला है। ग्रामीण महिलाओं को हर साल 18 हजार रुपये मिल रहे हैं, जिससे बेटियों की पढ़ाई निर्बाध जारी है। बावनकुले ने कहा कि, योजना से थोड़े समय का दबाव आया है, लेकिन राज्य के पास इसे संभालने की क्षमता है। आने वाले दो साल में स्थिति सामान्य हो जाएगी।
कुल मिलाकर, राजस्व विभाग अब पारदर्शिता, तकनीक और जनता की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए काम करेगा।









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